बहुत रोये हैं उन अश्कों की खातिर ,
जो निकलते हैं ख़ुशी की इन्तेहाँ पे ||
Saturday, October 23, 2010
उन अश्कों की खातिर...
प्रस्तुतकर्ता
शागिर्द - ए - रेख्ता
पर
Saturday, October 23, 2010
Email This
BlogThis!
Share to X
Share to Facebook


0 टिप्पणियाँ:
Post a Comment